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Flower bohot galat jagha aagai ho bohot pachtaogi

रात का वक्त — मुंबई

Moon Night Club

एक लड़की साइड में खड़ी सबको देख रही थी क्योंकि सभी लोग नशे में धुत होकर डांस फ्लोर पर नाच रहे थे। तभी उस लड़की के पास एक लड़की और दो लड़के आते हैं और उसे देखते हुए कहते हैं—

“अरे राही, यहाँ अकेले–अकेले क्या कर रही हो? चलो न, डांस करते हैं। आज हमारा कॉलेज फिनिश हो गया है, तो अब किस बात की टेंशन? हमें आज बस एंजॉय करना है। प्लीज चलो न।”

उनकी बात सुनकर राही मुस्कुराते हुए सामने खड़ी लड़की से कहती है—

“नहीं मुस्कान, मुझे नहीं जाना। प्लीज… मुझे क्लब और पार्टी बिल्कुल पसंद नहीं है। मेरा सिर घूमने लगता है, और ये लाइट्स देखो, कितनी तेज़ हैं… मुझे तो लग रहा है कि मैं अभी बेहोश हो जाऊंगी।”

राही की बात सुनकर मुस्कान उसे देखते हुए कहती है—

“अरे तू बेहोश थोड़ी ना हो जाएगी। तूने बस अपने मन में एक hallucination बना रखा है कि तू गिर जाएगी। ऐसा कुछ नहीं होता। हम भी तो डांस कर रहे हैं न? अच्छा, एक काम कर… तू एक पेग लगा ले, सब भूल जाएगी।”

मुस्कान की बात सुनकर उसके साथ खड़े दोनों लड़के—आयुष और अमन—उसके सिर पर हल्का-सा मारते हुए कहते हैं—

“कैसी बकवास बातें कर रही है तू? तुझे पता है न कि हमारी राही ड्रिंक नहीं करती, फिर भी उसे बोल रही है?”

आयुष की बात पर मुस्कान दाँत दिखाकर कहती है—

“अरे, अभी इंजॉय नहीं करेगी तो कब करेगी? शादी के बाद?”

फिर वह राही की ओर मुड़कर कहती है—

“हम कितने दिनों बाद क्लब आए हैं, वो भी तेरे पेरेंट्स से परमिशन लेकर। इसलिए प्लीज इसका फायदा उठा। चल, डांस करते हैं।”

इतना कहकर मुस्कान राही के हाथ में एक जूस का ग्लास पकड़ा देती है, लेकिन यह बात उससे अनजान थी कि वह जूस नहीं बल्कि बहुत स्ट्रॉन्ग वाइन थी।

राही मुस्कान की बात मान लेती है और एक ही घूंट में ग्लास खाली कर देती है।

जूस पीते ही उसका चेहरा बिगड़ जाता है और वह कहती है—

“छी… ये कितना कड़वा है! ऐसा कौन-सा जूस होता है जो इतना कड़वा हो?”

राही की बात पर मुस्कान हंसते हुए कहती है—

“पता नहीं कौन-सा जूस था… जो भी हो, पी लिया न? अब चल जल्दी, थोड़ा डांस करते हैं।”

राही ग्लास खत्म करती है और मुस्कान उसे खींचकर डांस फ्लोर पर ले जाती है।

चारों—राही, मुस्कान, आयुष और अमन—बहुत मज़े से नाच रहे थे। आज उनका बैचलर्स पूरा हुआ था और सब बहुत खुश थे।

राही भी डांस कर रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसका सिर भारी होने लगा। उसे सबकुछ डबल-दिखाई दे रहा था। घबराकर वह मुस्कान से कहती है—

“मुस्कान… मुझे ठीक नहीं लग रहा। मैं वॉशरूम होकर आती हूँ।”

मुस्कान सिर हिला देती है और रास्ता बता देती है। फिर दोबारा डांस में व्यस्त हो जाती है।

राही कॉरिडोर से गुजर रही थी, इस बात से अनजान कि दो जोड़ी आँखें उसे शक भरी नजरों से देख रही थीं।

वॉशरूम पहुँचकर वह फेस वॉश करती है। थोड़ा हल्का महसूस होता है, लेकिन बेचैनी अभी भी बनी हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे नशा चढ़ रहा हो।

वह धीरे-धीरे कॉरिडोर से वापस जा रही थी, लेकिन रास्ता भटककर लिफ़्ट की तरफ चली जाती है।अब उसकी आँखें पूरी तरह लाल थीं और चलना भी मुश्किल था।

Moon Night Club — एक रूम में

कॉरिडोर की लेफ्ट साइड के एक रूम में 15–20 लोग गंभीरता से बैठे हुए थे। उनके बीच बहुत सीरियस बातचीत चल रही थी।

तभी एक आदमी किंग-साइज़ सोफे पर बैठे शख्स से कहता है—

“मिस्टर शौर्य सिंह राठौड़, अगर आप चाहते हैं कि हम ये डील करें, तो आपको हमारी शर्त माननी होगी। वरना हम ये डील नहीं करेंगे।”

शौर्य अपनी डार्क आँखों से उसे देखते हुए ठंडे स्वर में कहता है—

“मैं आपकी एक भी शर्त मानने के लिए राजी नहीं हूँ, मिस्टर निकोलस। ये मेरा शहर है। अब मैं यहाँ का राजा हूँ। यहाँ जो भी होगा, मेरी मर्ज़ी से होगा। मैं किसी की शर्तों पर चलने वाला इंसान नहीं हूँ।”

उस आदमी ने गम्भीर होते हुए कहा—

“मिस्टर राठौड़, अगर आप ये डील मना करेंगे तो आपको बहुत बड़ा लॉस होगा। बेहतर है कि आप शर्त मान लें। प्रॉफिट का 70% हमारा और 30% आपका होगा।”

यह सुनते ही शौर्य ज़ोर से हँस पड़ता है—

“किसने कहा कि मैं ये डील कैंसिल कर रहा हूँ? और किसने कहा कि मैं 30% में खुश हूँ? अगर मुझे फायदा चाहिए… तो मैं पूरा 100% लूंगा। वरना 30% में मुझे बिल्कुल इंटरेस्ट नहीं।”

इतना कहकर शौर्य अपनी पॉकेट से एक छोटी रिवॉल्वर निकालता है और निकोलस के माथे के बीचों–बीच गोली मार देता है।

कमरा सन्न हो जाता है। सब लोग हैरान होकर शौर्य को देखते हैं। इस वक्त शौर्य का ऑरा बहुत डार्क हो चुका था।

तभी किसी ने दरवाज़ा खोला—

शौर्य की नज़र सामने जाती है, और उसकी आँखें और भी डार्क हो जाती हैं—

सामने राही खड़ी थी।

पूरी नशे में… लड़खड़ाती हुई।

राही चलते-चलते सीधे शौर्य के पास आती है, उसका पैर मुड़ता है…

और वह शौर्य के ऊपर गिर जाती है।

अब वह उसकी गोद में बैठी थी।

अपने दोनों हाथ शौर्य के गले में डालते हुए वह कहती है—

“Hello mister bunny… मैं गलती से यहाँ आ गई। मुझे अपनी फ्रेंड के पास जाना है… प्लीज मुझे छोड़ दो।”

कमरे में बैठे सब लोग कभी राही को देखते, कभी शौर्य को।

शौर्य का चेहरा अब लाल हो चुका था।

शौर्य अचानक राही की कमर पकड़ लेता है और गहरी आवाज़ में कहता है—

“Flower, तुम बहुत गलत जगह आ गई हो… और यहाँ से निकलना अब तुम्हारे लिए मुश्किल होगा।”

राही इधर-उधर देखती है और पाती है कि सब लोग उसे घूर रहे हैं।

वह शर्माकर शौर्य के सीने में चेहरा छुपा लेती है—

“Mister bunny… देखो न, सब मुझे कैसे देख रहे हैं… जैसे मैंने कोई कांड कर दिया हो। बोलो न कि मुझे ऐसे मत देखें। मुझे बहुत अनकंफर्टेबल लग रहा है…”

जैसे ही राही शिकायत करती है, कमरे में बैठे सारे लोग तुरंत नज़रें झुका लेते हैं।

क्योंकि शौर्य उन्हें अपनी ख़तरनाक आँखों से घूर रहा था।

शौर्य को राही के सांसों से शराब की महक महसूस हुई।

उसे समझने में देर नहीं लगी कि राही ने ड्रिंक की है।

“Flower… तुमने ड्रिंक किया है?”

शौर्य पूछता है।

राही मासूम बनते हुए कहती है—

“बिल्कुल नहीं। मैं ड्रिंक नहीं करती। मैंने तो सिर्फ मुस्कान ने जो जूस दिया था वही पिया था… पर वो बहुत कड़वा था। मेरा पूरा मुँह कड़वा हो गया।”

अब शौर्य समझ चुका था कि वह “कड़वा जूस” असल में स्ट्रॉन्ग रेड वाइन थी।

राही शौर्य की गोद में थोड़ा और नज़दीक आकर बैठ जाती है।

अब उनकी लोअर बॉडी एक-दूसरे से टच हो रही थी।

शौर्य का शरीर गर्म पड़ने लगता है।

वह नीचे नज़र डालता है और मन में कहता है—

“Ohh shit… ये क्या हो रहा है मेरे साथ? ऐसा तो कभी नहीं हुआ… मैं कंट्रोल क्यों नहीं कर पा रहा?”

उसी वक्त सामने बैठे लोग पूछते हैं—

“मिस्टर राठौड़, तो क्या हम डील फाइनल समझें? जैसे कहा—70% हमारा, 30% आपका प्रॉफिट?”

शौर्य के होंठों पर तिरछी मुस्कान आ जाती है—

“डील डन, मिस्टर मार्को। डील के सारे पेपर्स कल तक आपको मिल जाएंगे। आ

प साइन करके मुझे वापस भेज दीजिएगा। तब तक के लिए मीटिंग क्लोज।”

इतना कहकर शौर्य राही को गोद में उठाता है और रूम से बाहर चला जाता है।

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